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Apr 02, 2025
चौपाल न्यूज़ नेटवर्क

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रातों-रात स्टार बनी अभिनेत्री को मौत के बाद नहीं नसीब हुए चार कंधे

अभिनेत्री विमी की व्यथा-कथा

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फिल्म इंडस्ट्री में विमी एक ऐसा नाम है, जिसने कम समय में शोहरत, दौलत और सफलता कमाई। अफसोस जितनी तेजी से उसने बुलंदियों को छुआ, उससे कहीं तेजी से वह सबकी नजरों से इस कदर ओझल हुईं कि आज शायद ही ये नाम किसी को याद होगा। एक समय था जब बाॅलीवुड के गलियारों में विमी इस कदर छाईं कि हर कोई उनकी एक झलक पाने को बेकरार रहता था। बेहद कम वक्त में स्टारडम पाया और फिर दूसरे ही पल में उनका स्टारडम ऐसा खोया कि वो हमेशा के लिए गुमनामी के अंधेरों में खो गईं। किस तरह से ये खूबसूरत अदाकारा गुमनामी के पन्नों में खो गईं और कभी वापस ना लौट सकीं। एक शादीशुदा लड़की और दो बच्चों की मां किस तरह से रातों-रात बन गई बाॅलीवुड की सुपरस्टार।
एक समय ऐसा भी था, जब विमी बाॅलीवुड की चहेती हिरोइनों में से एक थीं। विमी ने उस समय के सुपरस्टार सुनील दत्त, शशि कपूर और राज कुमार के साथ काम किया। विमी के लिए ये स्टारडम सिर्फ चार दिन की चांदनी बनकर आया और चला गया। बी.आर. चोपड़ा की सस्पेंस थ्रिलर फिल्म हमराज हिट साबित हुई। इस फिल्म में विमी के अपोजिट थे उस समय के सुपरस्टार सुनील दत्त, राज कुमार और बलराज साहनी। इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट रहे। इस फिल्म को नेशनल बेस्ट फीचर फिल्म का अवाॅर्ड भी मिला।
फिल्म हमराज के लिए बीआर चोपड़ा प्लानिंग कर रहे थे एक ऐसे चेहरे की जो बिल्कुल नया और दिलकश हो। दरअसल, चोपड़ा साहब किसी न्यू कमर को अपनी फिल्म में लेना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने कई लड़कियों के आॅडिशंस भी लिए, लेकिन बात नहीं बनी। उनकी ये तलाश आकर विमी पर खत्म हुई। संगीतकार रवि ने चोपड़ा साहब को विमी के बारे में बताया। हैरानी की बात तो ये है कि विमी से मिलने के बाद वो एक ही नजर में बी.आर. चोपड़ा को अपनी फिल्म के रोल के लिए समझ में आ गईं। उन्होंने बिना किसी देरी के विमी को फिल्म हमराज के लिए साइन कर लिया। फिल्म हमराज विमी के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई और वो रातों-रात सुपरस्टार बन गईं।
फिल्म हमराज के बाद हर तरफ केवल विमी के चर्चे होने लगे। आलम तो ये था कि विमी हर मैगजीन के कवर पेज पर छा गईं। उस समय फिल्म मैगजीन के कवर पेज पर आना ही बड़ी बात मानी जाती थी। विमी का यूं मैगजीन के कवर पेज पर आने का इशारा यही था कि वो एक स्टार बन गईं हैं। जिसे रातोंरात स्टाइल आइकॉन मान लिया गया है। विमी ने हमराज फिल्म के बाद ’वचन’, ’पतंगा’, ’आबरू’, ’कहीं आर कहीं पार’, ’नानक नाम जहाज है’ जैसी फिल्में की।
फिल्म हमराज से विमी ने जितनी तेजी से एक ही दिन में स्टारडम हासिल किया, उतनी ही तेजी से उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। यूं कह सकते हैं कि विमी एक ही फिल्म के लिए बाॅलीवुड में आई और फिर हमेशा के लिए गुमनामी के अंधेरों में गुम हो गई। ऐसा नहीं है कि उन्होंने फिल्म हमराज के बाद काम नहीं किया। दरअसल, फिल्म हमराज के बाद उन्होंने तीन और फिल्में की, जिनमें आबरू, वचन और पतंगा शामिल थी। लेकिन अफसोस की बात ये कि सभी फिल्में विमी के कॅरियर के लिए घातक ही साबित हुई। फिल्म आबरू में उनके साथ न्यू कमर दीपक कुमार थे, मगर यह फिल्म नहीं चली। इसके बाद विमी ने दो फिल्में शशि कपूर के साथ भी कीं, एक थी पतंगा और दूसरी थी वचन। ये दोनों फिल्में भी बाक्स आॅफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाईं।
विमी की फिल्में जैसे ही फ्लाॅप होने लगी, उन्हें फिल्मों के आॅफर आने भी बंद हो गए। यहां तक कि बी.आर. चोपड़ा साहब ने भी उनको आगे अपनी किसी भी फिल्म में चांस नहीं दिया। जब विमी का असफलता का दौर चल रहा था तो उसी दौरान विमी अपने पति शिव अग्रवाल से अलग हो गईं। शिव कलकत्ता के बिजनेसमैन थे। अपने पति शिव से अलग होने के बाद विमी जाॅली नाम के शख्स के साथ रहने लगी। कहा जाता है कि जाॅली एक ब्रोकर थे. अपने पति को छोड़कर जाॅली के साथ रहना उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
विमी के जीवन में जाॅली का आना एक भूचाल साबित हुआ। जाॅली ने विमी को इस कदर बरबाद कर दिया कि वो फिर दोबारा संभल न सकीं. जाॅली के कारण बिजनेस, प्राॅपर्टी के अलावा विमी की टैक्सटाइल मिल भी बंद हो गई. हालात इतने खराब हो गए कि जिंदगी की परेशानियों से जूझने के लिए विमी ने शराब का सहारा ले लिया।
शराब की लत उन्हें अंत तक ले गई। 1943 में पंजाबी परिवार में जन्मी विमी सिर्फ 34 साल की उम्र में इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गईं। आलम तो ये था कि उनकी मौत के समय उनके पास उनका कोई अपना नहीं था, ना ही पति और ना ही बच्चे। विमी की मौत की खबर किसी अखबार में आना तो दूर की बात बल्कि उनके रिश्तेदारों को उनकी मौत की खबर तक ना पहुंची। उनके मृत शरीर को एक ठेले पर ले जाया गया था। कलाकारों की दुनिया एक ऐसी जगह है जहां स्वार्थ, सफलता, धन और महात्वाकांक्षाओं के मध्य इन्सानी जिन्दगी कोई मायने नहीं रखती! दूषित पुरूषत्व से लबालब इस दुनिया में विमी एक खिलौना भर बनकर रह गईं ।

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