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उत्तर प्रदेश 

शहर से कहीं ज्यादा अपना ही विकास करने में जुटा ‘महकमा’, गायब कर दी 23000 फाइलें

चौपाल न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। अगर आपसे कहा जाय कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसा विभाग है जहां सरकारी अधिकारी और कर्मचारी से ज्यादा माफियाओं की चलती है, जिनके एक इशारे पर फाइलों के आदेश बदल जाते हैं। फाइलों में लगे दस्तावेज गायब करने में भी कोई संवैधानिक दायित्व आड़े नहीं आता है। और तो और विभाग में चिन्हित भू-माफिया कानूनी दस्तावेज में फरार, वांटेड चल रहे हों लेकिन उनका ठिकाना वही सरकारी दफ्तर बन जाता रहा हो... तो आपको आश्चर्य का शायद ही ठिकाना हो, लेकिन हम यहां विभाग का ठिकाना जरूर बताने वाले हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं लखनऊ विकास प्राधिकरण का। सत्ता-शासन की नाक के नीचे ही भ्रष्टाचार का जो खेल इस विभाग में खेला जाता है वह किसी से भी छिपा हुआ नहीं है, लेकिन अफसोस समय-समय पर सरकार के नुमाइंदे, मंत्री-संत्री से लेकर शासन के अधिकारी-कर्मचारी अपने-अपने स्वार्थ में संलिप्त रहे और विभाग में भ्रष्टाचार चरमोत्कर्ष को प्राप्त करता चला गया। हालत यह है कि जिस महकमें के ऊपर शहर के विकास की जिम्मेदारी थी उस महकमे के भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों ने माफियाओं के साथ मिलकर अपना जमकर विकास तो किया ही साथ ही साथ अपने महकमे को डुबो कर रख दिया है। हालत यह है कि विभाग की गोपनीय 23000 फाईलें गायब पायी गईं हैं।
हाल ही में जिलाधिकारी की अचानक छापेमारी के दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण में एक शख्स फाइल चेक करता हुआ नजर आया। जिसकी पहचान दिलीप सिंह बाफिला के रूप में की गई। दिलीप सिंह बाफिला लखनऊ प्रशासन का घोषित भू-माफिया है, जिसने एलडीए से लेकर ग्राम समाज की जमीनों को कब्जा कर अपनी तिजोरी भर रखी है और सीतापुर हाईवे पर हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग का मालिक भी है। भू-माफिया दिलीप सिंह बाफिला लखनऊ विकास प्राधिकरण के मुख्यालय में एक तहसीलदार के कमरे में बैठकर गोपनीय फाइलें उलट-पलट करता हुआ नजर आया। मजे की बात है कि जिन फाइलों के पर गोपनीय लिखा होता है, जिन फाइलों को अनाधिकृत व्यक्ति के द्वारा देखना भी अपराध होता है, लेकिन भू-माफिया दिलीप सिंह बाफिला उन फाइलों का मुआयना बड़ी आसानी से कर लेता है। दिलीप सिंह बाफिला पर अकेले लखनऊ के छह थानों गोमतीनगर, चिनहट, हजरतगंज, विभूति खंड, मडियांव और गोसाईगंज में दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। दिलीप सिंह बाफिला को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और ये लखनऊ प्रशासन का घोषित भू-माफिया भी है। 
दिलीप सिंह बाफिला तो एक चेहरा भर है जो बीते सप्ताह एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश की छापेमारी में सामने आ गया। लेकिन, असल में ऐसे एक दो नहीं पूरे 119 चिन्हित भू-माफिया हैं जिन्होंने एलडीए की जमीनों पर कब्जा कर रखा है। दो माह पहले ही तैयार हुई जिला प्रशासन के द्वारा भू-माफियाओं की सूची में एलडीए के 119 भू-माफिया चिन्हित हुए। इनमे बरेली जेल में बंद माफिया डॉन ओम प्रकाश श्रीवास्तव ‘बबलू’, दिलीप सिंह बाफिला, ताराचंद बिष्ट, राम सिंह, बनवारी यादव, अजय यादव, सलीम सोहराब, लल्लू यादव, जयकार मिश्रा, सूर्यभान मिश्रा, फुरकान अहमद अब्बासी, राजेंद्र सिंह दुआ, राजू बाबू रस्तोगी, एहसान उर्फ जीशान सुफियान उर्फ छोटू, राशिद बेग, रवि निगम, सरदार बृजेंद्र सिंह के का नाम भी हैं। भू-माफियाओं की लखनऊ विकास प्राधिकरण में पैठ का ही नतीजा है कि प्राधिकरण के स्कैनिंग को गई एक दो नहीं पूरी 23000 फाइलें गायब हैं। इसके साथ ही कीमती भूखंडों को रिटायर हो चुके कर्मचारियों के नाम पर भू-माफियाओं की मिलीभगत से किया गया ट्रांसफर भी एलडीए के भ्रष्टाचार का नमूना है। एलडीए के बाबू की लॉगिन आईडी बदल कर किया गया फाइलों से करोड़ों का खेल भी जांच के दायरे में है।

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